दुनिया के ये देश हैं पक्के दोस्त, परमाणु युद्ध हो जाए या आए कोई आपदा नहीं छोड़ते साथ

दुनिया के ये देश हैं पक्के दोस्त, परमाणु युद्ध हो जाए या आए कोई आपदा नहीं छोड़ते साथ

दुनिया में ऐसे कई देश हैं जिनके बीच गहरे राजनयिक, सैन्य और आर्थिक संबंध हैं, जो उन्हें मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देने के लिए प्रेरित करते हैं। परमाणु युद्ध या बड़ी आपदा जैसी चरम स्थितियों में, ये गठबंधन और दोस्ती और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

यहां कुछ ऐसे देश और गठबंधन दिए गए हैं जो अपनी मजबूत दोस्ती और एक-दूसरे के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाने जाते हैं:

1. संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम: इन दोनों देशों के बीच एक “विशेष संबंध” (Special Relationship) है जो मजबूत सैन्य, खुफिया और आर्थिक सहयोग पर आधारित है। वे कई ऐतिहासिक संघर्षों में एक साथ खड़े रहे हैं और एक-दूसरे की परमाणु क्षमताओं को बनाए रखने में भी मदद की है।

2. नाटो (NATO) सदस्य देश: उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) एक सैन्य गठबंधन है जिसके सदस्य सामूहिक रक्षा के सिद्धांत पर आधारित हैं। इसका मतलब है कि अगर किसी एक सदस्य देश पर हमला होता है, तो बाकी सभी सदस्य उसे अपने ऊपर हमला मानते हुए उसकी मदद करेंगे। परमाणु युद्ध की स्थिति में, नाटो के परमाणु हथियार संपन्न सदस्य (जैसे अमेरिका, यूके और फ्रांस) एक सामूहिक प्रतिरोध (collective deterrence) प्रदान करते हैं। इसके सदस्य देशों में अमेरिका, कनाडा, यूके, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन और कई अन्य यूरोपीय देश शामिल हैं।

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3. भारत और रूस: भारत और रूस के बीच लंबे समय से एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी रही है। रूस भारत का एक प्रमुख सैन्य आपूर्तिकर्ता रहा है, और दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक और राजनीतिक संबंध हैं। वे कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं।

4. अमेरिका और उसके एशिया-प्रशांत सहयोगी: अमेरिका के जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ गहरे सुरक्षा गठबंधन हैं। ये गठबंधन क्षेत्रीय स्थिरता और सामूहिक रक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं, खासकर किसी बड़े खतरे या आपदा की स्थिति में।

5. न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया: ये दोनों देश भूगोल और संस्कृति के मामले में एक-दूसरे के करीब हैं और इनके बीच मजबूत रक्षा और आपदा राहत सहयोग है। किसी बड़ी आपदा की स्थिति में, ये देश अक्सर एक-दूसरे की मदद के लिए सबसे पहले आगे आते हैं।

वे देश जो अपनी तटस्थता और तैयारियों के लिए जाने जाते हैं:

कुछ देश ऐसे भी हैं जो अपनी मजबूत तैयारियों और तटस्थता के कारण किसी भी वैश्विक आपदा की स्थिति में अपेक्षाकृत सुरक्षित माने जाते हैं:

  • स्विट्जरलैंड: अपनी लंबी तटस्थता नीति और व्यापक बंकर प्रणाली के लिए जाना जाता है, जो इसे परमाणु हमले की स्थिति में अपनी आबादी की रक्षा करने में सक्षम बनाती है।
  • न्यूजीलैंड: भौगोलिक रूप से अलग-थलग होने और मजबूत कृषि प्रणाली के कारण इसे परमाणु युद्ध के बाद सबसे सुरक्षित स्थानों में से एक माना जाता है।
  • आइसलैंड: अपनी दूरस्थता, सैन्यीकरण की कमी और भू-तापीय ऊर्जा के कारण इसे सुरक्षित माना जाता है।
  • अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया: एक शोध के अनुसार, इन देशों में मजबूत कृषि प्रणालियों के कारण परमाणु युद्ध के बाद सभ्यता के कुछ पहलुओं के बचे रहने की सबसे अधिक संभावना है।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि परमाणु युद्ध जैसी चरम स्थिति में, किसी भी देश का “पूरी तरह से सुरक्षित” रहना असंभव है, लेकिन ये देश और उनके गठबंधन विपरीत परिस्थितियों में एक-दूसरे का समर्थन करने की अपनी क्षमता के लिए जाने जाते हैं।

आपका शीर्षक बहुत दिलचस्प है – “दुनिया के ये देश हैं पक्के दोस्त, परमाणु युद्ध हो जाए या आए कोई आपदा, नहीं छोड़ते साथ”। यह दर्शाता है कि कुछ देश इतने गहरे रणनीतिक, सैन्य और राजनयिक रिश्तों में बंधे हैं कि वे किसी भी वैश्विक संकट या युद्ध की स्थिति में भी एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ते। आइए ऐसे कुछ मजबूत अंतरराष्ट्रीय मित्रताओं पर नज़र डालते हैं:

 Strategic & Unbreakable Alliances

1. भारत – रूस (India – Russia)

  • रिश्ते की गहराई: दशकों पुरानी दोस्ती, शीत युद्ध के समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी।
  • सैन्य सहयोग: रूस भारत को हथियारों का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है (S-400, ब्रह्मोस मिसाइल आदि)।
  • विश्वास: रूस ने कई बार संयुक्त राष्ट्र में भारत के पक्ष में वोट किया है।
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2. अमेरिका – ब्रिटेन (USA – UK)

  • “Special Relationship”: दोनों देशों के बीच Cultural, political, and military alliances गहरा है।
  • NATO सहयोग: दोनों NATO के प्रमुख सदस्य हैं और अक्सर एक साथ युद्धों में उतरे हैं।
  • इंटेलिजेंस साझेदारी: ‘Five Eyes’ के तहत गुप्तचर सूचनाएं साझा करते हैं।
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3. चीन – पाकिस्तान (China – Pakistan)
  • “Iron Brothers”: They call each other ‘Iron Brother कहते हैं।
  • CPEC परियोजना: चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा, अरबों डॉलर का निवेश।
  • Military cooperation: संयुक्त सैन्य अभ्यास, हथियारों की आपूर्ति, कूटनीतिक समर्थन।
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4. उत्तर कोरिया – चीन (North Korea – China)
  • राजनीतिक संरक्षण: चीन ने अक्सर संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया का बचाव किया है।
  • आर्थिक निर्भरता: उत्तर कोरिया की अधिकांश आयात-निर्यात चीन के माध्यम से होती है।
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5. फ्रांस – जर्मनी (France – Germany)
  • यूरोपीय एकता का आधार: दोनों देश EU के संस्थापक स्तंभ हैं।
  • Shared Military Brigade: ‘Franco-German Brigade’ जैसी संयुक्त सैन्य ताकतें।
  • राजनीतिक समन्वय: EU नीति निर्धारण में साथ काम करते हैं।
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परमाणु युद्ध या आपदा की स्थिति में भी साथ देने वाले रिश्ते

कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जिनमें देशों ने आपदा और युद्ध की स्थिति में भी साथ देने की संधियां की होती हैं:

NATO (North Atlantic Treaty Organization)
  • अनुच्छेद 5 कहता है: एक देश पर हमला, सभी पर हमला समझा जाएगा”
  • अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी आदि इसमें शामिल हैं।
QUAD और AUKUS जैसे रणनीतिक मंच
  • QUAD: भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया – इंडो-पैसिफिक सुरक्षा के लिए गठबंधन।
  • AUKUS: ऑस्ट्रेलिया, UK और अमेरिका के बीच सैन्य तकनीकी साझेदारी।
भारत के भरोसेमंद साथी
  • रूस: ऐतिहासिक, सैन्य और कूटनीतिक समर्थन।
  • फ्रांस: राफेल डील, रक्षा तकनीकी सहयोग।
  • इज़राइल: खुफिया जानकारी, रक्षा उपकरण, कृषि सहयोग।
  • अमेरिका: हाल के वर्षों में सामरिक संबंध गहरे हुए हैं, हालांकि इसमें “जिम्मेदारी संतुलन” भी है।

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