मुंबई: टेक्नोलॉजी के इस दौर में जहां मोबाइल SIM कार्ड डिजिटल रूप ले चुके हैं, वहीं साइबर ठग भी नए-नए तरीकों से लोगों को शिकार बना रहे हैं। मुंबई के एक व्यवसायी के साथ ऐसा ही कुछ हुआ, जब वह eSIM फ्रॉड का शिकार बन गया और उसके बैंक खाते से चंद मिनटों में 4 लाख रुपये गायब हो गए।
eSIM फ्रॉड क्या है पूरा मामला?
मुंबई के रहने वाले एक 38 वर्षीय व्यवसायी को एक कॉल आई, जिसमें खुद को मोबाइल कंपनी का प्रतिनिधि बताने वाले व्यक्ति ने eSIM अपडेट के नाम पर बात की। ठग ने बड़ी चालाकी से व्यवसायी को एक लिंक भेजा और कहा कि eSIM अपडेट करने के लिए उसे इस लिंक पर क्लिक कर कुछ स्टेप्स फॉलो करने होंगे।
जैसे ही शख्स ने लिंक पर क्लिक किया और मांगी गई जानकारी दी, उसका मोबाइल नेटवर्क अचानक बंद हो गया। इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता, उसके बैंक खाते से कुल 4 लाख रुपये निकाल लिए गए।
eSIM कैसे हुआ फ्रॉड?
- फिशिंग कॉल: ठगों ने मोबाइल कंपनी का प्रतिनिधि बनकर भरोसा जीतने की कोशिश की।
- फर्जी लिंक भेजा: शख्स को एक लिंक भेजा गया जो असली वेबसाइट जैसी लग रही थी।
- OTP और पर्सनल जानकारी ली: लिंक पर क्लिक करने के बाद व्यवसायी ने OTP समेत जरूरी जानकारी शेयर कर दी।
- SIM स्वैप / eSIM एक्टिवेशन: इन जानकारियों से ठगों ने पीड़ित का eSIM अपने डिवाइस में Activate कर लिया।
- बैंकिंग एक्सेस: अब उनके पास OTP आने लगा और ठगों ने नेट बैंकिंग/ UPI के जरिए पैसे ट्रांसफर कर लिए।

क्या है eSIM?
eSIM एक Virtual SIM card होता है जो फोन में फिजिकली नहीं डाला जाता। इसे QR कोड या सेटिंग्स के ज़रिए Activate किया जाता है। इसी तकनीक का गलत इस्तेमाल करके ठग मोबाइल नेटवर्क को अपने डिवाइस में ट्रांसफर कर लेते हैं।
eSIM कैसे बचें ऐसे फ्रॉड से?
- किसी Unknown Call या लिंक पर भरोसा न करें।
- मोबाइल नेटवर्क बंद हो जाए तो तुरंत अलर्ट हो जाएं।
- बैंकिंग या SIM से जुड़ी कोई भी प्रक्रिया केवल आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से ही करें।
- मोबाइल और बैंक अकाउंट में अलग-अलग नंबर रजिस्टर करें।
- मोबाइल नंबर से जुड़े किसी भी बदलाव की जानकारी SMS/ईमेल से मिलेगी, उसे नजरअंदाज न करें।
पुलिस क्या कहती है? eSIM
मुंबई साइबर सेल इस मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी Unknown Call या संदेश पर निजी जानकारी शेयर न करें।
eSIM कैसे काम करता है?
eSIM एक चिप होती है जो मोबाइल डिवाइस के मदरबोर्ड में लगी रहती है। इसमें मोबाइल नेटवर्क प्रोवाइडर की प्रोफाइल यानी सारा डेटा डिजिटल रूप से स्टोर किया जाता है। जब आप eSIM एक्टिवेट करते हैं, तो मोबाइल कंपनी आपको एक QR Code or Activation Details देती है, जिसे स्कैन करके आप अपने फोन में SIM चालू कर सकते हैं — बिना किसी प्लास्टिक SIM कार्ड के।
eSIM के फायदे:
- फिजिकल SIM की ज़रूरत नहीं: कार्ड खोने या काटने की कोई टेंशन नहीं।
- मल्टीपल प्रोफाइल्स: एक ही डिवाइस में कई नेटवर्क प्रोफाइल सेव कर सकते हैं।
- तेजी से एक्टिवेशन: दुकान पर जाने की ज़रूरत नहीं, घर बैठे SIM चालू।
- सिक्योरिटी बेहतर: eSIM को क्लोन करना या बदलना मुश्किल होता है (हालांकि नए तरीकों से फ्रॉड भी हो रहे हैं)।
- स्पेस की बचत: डिवाइस के अंदर स्पेस बचता है, जिससे कंपनियां और फीचर जोड़ सकती हैं।

eSIM के नुकसान (या सावधानियाँ):
- अभी सभी स्मार्टफोन्स में सपोर्ट नहीं है।
- Travel करते Time लोकल SIM लेना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
- यदि फोन गुम हो जाए या नेटवर्क बंद हो जाए, तो SIM निकालकर दूसरे फोन में नहीं डाल सकते।
- eSIM फ्रॉड के मामले भी बढ़ रहे हैं (जैसे कि ऊपर बताया गया था)।

eSIM कैसे लें?
- अगर आपके पास eSIM सपोर्टेड फोन है (जैसे iPhone XS और उसके बाद के मॉडल, Pixel, Samsung के कुछ मॉडल),
- तो अपनी टेलिकॉम कंपनी (जैसे Jio, Airtel, Vi) से संपर्क करें।
- वे आपको एक QR कोड देंगे जिसे स्कैन कर eSIM एक्टिवेट किया जा सकता है।
निष्कर्ष: eSIM टेक्नोलॉजी जहां सुविधाजनक है, वहीं इसके साथ साइबर सुरक्षा भी जरूरी हो गई है। थोड़ी सी सावधानी आपको लाखों रुपये के नुकसान से बचा सकती है।

