BCCI विवाद की मुख्य वजहें और उठी मांगें
1. श्रेयस अय्यर और यशस्वी जायसवाल का बहिष्कार
- श्रेयस अय्यर को टीम में शामिल न करने के फैसले की काफी आलोचना हो रही है। BCCI के प्रमुख चयनकर्ता अजित अगरकर ने स्पष्ट किया है कि “हम श्रेयस को सिर्फ बेंच पर नहीं बैठा सकते”, इसलिए उन्हें टीम से बाहर रखा गया ताकि भविष्य में उन्हें खेलते रहने का मौका मिले और साहस बना रहे।
- पूर्व क्रिकेटर सदगोप्पन रमेश ने इस निर्णय पर सवाल उठाए और कहा कि ऐसा लगता है जैसे गौतम गंभीर, जो राष्ट्रीय मुख्य कोच हैं, केवल उन खिलाड़ियों का साथ देते हैं जिन्हें वे निजी रूप से पसंद करते हैं।
- यशस्वी जायसवाल की टीम से बाहर रहना भी विवाद का हिस्सा रहा, कई पूर्व खिलाड़ी और समर्थक मानते हैं कि उनकी जगह शुभमन गिल को वाइस‑कैप्टन बनाकर व्यक्तिगत पसंद और प्रतिष्ठा को तवज्जो दी गई है, बजाय मापदंड के।
2. पक्षपात (Favoritism) का आरोप
- अभिषेक नायर ने इस बात पर सवाल उठाया कि क्या चयन में व्यक्तिगत पसंद (favor) का हिस्सा रहा है—विशेषकर कोच गंभीर द्वारा अपने सहयोगी खिलाड़ियों को समर्थन देने की प्रवृत्ति पर। उन्होंने कहा, “Maybe Shreyas isn’t as favoured as someone else.”
- सोशल मीडिया पर भी चर्चा है कि रिंकू सिंह और हर्षित राणा जैसे खिलाड़ी, जिनकी IPL में प्रदर्शन औसतन था, उन्हें भेजकर चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए गए।
3. टीम सेलेक्शन की रणनीतिक रूपरेखा
- रॉस टेलर, न्यूजीलैंड के पूर्व क्रिकेटर ने बताया कि श्रेयस अय्यर की टीम से छुट्टी यह दर्शाती है कि भारत की टीम में गहरी प्रतिभा है, और इसका मतलब है कि इस बार चयनकों ने मजबूती से किसी ताज़ा फिट खिलाड़ी को वरीयता दी।
- हालांकि यह चयन अच्छा रणनीतिक कदम हो सकता है, पर इसकी वजह से चयन प्रक्रिया में उचित मापदंड और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठे हैं।
क्या हो सकता है बड़ा बदलाव?
- चयन समिति में बदलाव:
BCCI ने टीम चयन की घोषणा के बाद ही दो चयनकर्ताओं को बदलने के लिए आवेदन आमंत्रित कर दिए हैं। इससे चयन प्रक्रिया में संभावित सुधार और निष्पक्षता लाने की कोशिश दिखाई देती है। - उभरते खिलाड़ियों को मौका मिलना:
टीम में युवा प्रतिभाओं को जगह दी जा सकती है—विशेषकर अगर चयन में बनावट या व्यक्तिगत पसंद का दबाव कम करने की पहल हुई तो भविष्य में प्रदर्शन पर आधारित चयन आसान होगा। - प्रेस कॉन्फ्रेंस में पारदर्शिता:
वर्तमान में पत्रकारों को पाकिस्तान से संबंधित सवाल रोक दिए गए हैं—यह संचार नीति और चयन पर उठते सवालों पर जवाबदेही को प्रभावित करता है। यदि भविष्य में प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलकर सवाल-जवाब हो, तो यह चयन प्रक्रिया पर विश्वास बढ़ा सकता है। - टीम में व्यापक विस्तार:
विवाद के बीच यह भी पूछा जा रहा है कि जब 17 सदस्यों तक की टीम बनाने की अनुमति थी, तो BCCI ने सिर्फ 15 खिलाड़ी क्यों शामिल किए? अगर दो अतिरिक्त खिलाड़ियों को शामिल किया गया होता, तो विवाद की संभावना कम हो सकती थी।
विवाद की जड़ मुख्यतः चयन में पक्षपात की आशंका, श्रेयस अय्यर और यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ियों का बहिष्कार, और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता न होने में है।
बड़ी संभावित परिवर्तन हैं:
- चयन समिति में बदलाव,
- युवा खिलाड़ियों को अवसर,
- प्रेस संवाद में स्पष्टता,
- अनुरूप टीम आकार (17 सदस्यों पर विचार).
इन सुधारों से BCCI के सामने खड़ा यह “बवाल” शांत हो सकता है, और चयन प्रक्रिया में विश्वसनीयता बढ़ सकती है।
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