आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आया है। अब यह तकनीक आंखों की देखभाल के क्षेत्र में भी एक नया अध्याय लिख रही है। AI की मदद से अब आंखों की बीमारियों का पता उनके शुरुआती लक्षण दिखने से भी बहुत पहले लगाया जा सकता है, जिससे मरीजों को समय पर इलाज मिल सकेगा और वे गंभीर जटिलताओं से बच पाएंगे।
AI सिस्टम को लाखों आंखों काम करता है?
पारंपरिक रूप से आंखों की बीमारियों का पता लगाने के लिए डॉक्टर रेटिना और ऑप्टिक नर्व की जांच करते हैं। यह प्रक्रिया काफी समय लेती है और कई बार बीमारी के शुरुआती सूक्ष्म बदलावों को पहचान पाना मुश्किल होता है। यहीं पर AI की क्षमता सामने आती है।
- डेटा विश्लेषण की शक्ति: AI सिस्टम को लाखों आंखों के स्कैन, रेटिना की तस्वीरों और अन्य मेडिकल डेटा पर प्रशिक्षित किया जाता है। यह सिस्टम इन विशाल डेटासेट का विश्लेषण करता है और ऐसे सूक्ष्म पैटर्न और बदलावों को पहचान सकता है जो मानव आँख के लिए अदृश्य होते हैं।
- तेज और सटीक निदान: जब किसी मरीज की आंखों का स्कैन किया जाता है, तो AI एल्गोरिदम कुछ ही सेकंड में उस स्कैन का विश्लेषण कर लेता है। यह रेटिना, रक्त वाहिकाओं और ऑप्टिक नर्व की स्थिति का मूल्यांकन करता है और किसी भी असामान्यता या बीमारी के शुरुआती संकेत का पता लगाता है।
- फंडस कैमरा और स्मार्टफोन तकनीक: कई नई तकनीकों में पोर्टेबल, नॉन-माइक्रोटिक फंडस कैमरे का उपयोग किया जाता है, जो स्मार्टफोन तकनीक पर काम करते हैं। ये उपकरण आंख के पिछले हिस्से की विस्तृत छवियां लेते हैं, जिन्हें AI टूल तुरंत विश्लेषण के लिए उपयोग करता है।
किस तरह की बीमारियों का पता लगाना संभव है?
AI-आधारित तकनीकें कई आंखों की बीमारियों का पता लगाने में प्रभावी साबित हो रही हैं, जिनमें सबसे प्रमुख हैं:
डायबिटिक रेटिनोपैथी:
यह मधुमेह के रोगियों में होने वाली एक गंभीर बीमारी है, जो धीरे-धीरे दृष्टि को नुकसान पहुंचाती है। AI सूक्ष्म रक्तस्राव (microaneurysms) और अन्य शुरुआती संकेतों को पहचानकर इस बीमारी का पता लगा सकता है, जब मरीज को कोई लक्षण महसूस नहीं होते।
निश्चित रूप से, यहाँ “ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद): इसे ‘दृष्टि का मूक चोर’ (silent thief of sight) भी कहा जाता है, क्योंकि यह बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचाता है” के बारे में थोड़ा विस्तार से जानकारी दी गई है:
ग्लूकोमा (काला मोतियाबिंद): ‘दृष्टि का मूक चोर‘
ग्लूकोमा को ‘दृष्टि का मूक चोर‘ कहा जाता है क्योंकि यह अक्सर बिना किसी दर्द या स्पष्ट शुरुआती लक्षण के आपकी नज़र को धीरे-धीरे चुराता है।
ऑप्टिक नर्व वह नस है जो आँखों से प्राप्त होने वाली दृश्य जानकारी को मस्तिष्क तक पहुंचाती है। जब यह नस क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो हमारी देखने की क्षमता, विशेष रूप से किनारे की दृष्टि (peripheral vision) कम होने लगती है।
समस्या यह है कि जब तक रोगी को अपनी दृष्टि रोगी में कमी महसूस होती है, तब तक ऑप्टिक नर्व को पहले ही काफी नुकसान हो चुका होता है। यह क्षति (irreversible) होती है, यानी इसे ठीक नहीं किया जा सकता। यही कारण है कि समय पर इसका पता लगाना और उपचार शुरू करना बहुत ज़रूरी है। Ai जैसी नई तकनीकें इसी चुनौती को हल करने में मदद करती हैं, क्योंकि वे शुरुआती, सूक्ष्म बदलावों को पहचान सकती हैं, जब मरीज को कोई लक्षण महसूस नहीं होते।
उम्र-संबंधी मैक्यूलर डिजनरेशन (AMD):
यह बीमारी केंद्रीय दृष्टि को प्रभावित करती है। AI रेटिना में होने वाले शुरुआती बदलावों को पहचानकर AMD का पता लगाने में मदद कर सकता है।
उम्र-संबंधी मैक्यूलर डिजनरेशन (AMD) आँखों की एक बीमारी है जो उम्र बढ़ने के साथ होती है। इसमें, रेटिना के केंद्रीय हिस्से, जिसे मैक्यूला कहते हैं, को नुकसान पहुंचता है। मैक्युला हमें स्पष्ट, बारीक और केंद्रीय दृष्टि प्रदान करता है, जो पढ़ने, गाड़ी चलाने और चेहरे पहचानने जैसे कामों के लिए ज़रूरी है। जब मैक्युला क्षतिग्रस्त हो जाता है, तो केंद्रीय दृष्टि धीरे-धीरे कम होने लगती है।
मरीजों को होने वाले फायदे:
- समय पर इलाज: सबसे बड़ा फायदा यह है कि बीमारी का पता शुरुआती चरण में ही चल जाता है, जिससे तुरंत इलाज शुरू किया जा सकता है और दृष्टि के स्थायी नुकसान को रोका जा सकता है।
- सटीक निदान: AI की मदद से निदान की सटीकता बढ़ जाती है, जिससे गलत निदान की संभावना कम हो जाती है।
- आसान जांच: पोर्टेबल AI-आधारित उपकरण स्वास्थ्य केंद्रों और दूरदराज के इलाकों में भी आसानी से जांच करने की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे नेत्र देखभाल तक पहुंच बढ़ जाती है।
- लागत में कमी: शुरुआती चरण में बीमारी का पता चलने से महंगे और जटिल इलाज की आवश्यकता कम हो जाती है, जिससे मरीजों का पैसा भी बचता है।
AI-आधारित नेत्र देखभाल तकनीक भविष्य में एक बड़ा बदलाव लाने वाली है। यह न केवल डॉक्टरों के काम को आसान बनाएगी, बल्कि मरीजों के लिए भी नेत्र रोगों की रोकथाम और इलाज को अधिक सुलभ, तेज और सटीक बनाएगी। हालांकि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि AI केवल एक सहायक उपकरण है और यह अनुभवी नेत्र रोग विशेषज्ञों की जगह नहीं ले सकता।

